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Poem of Mother in Hindi - माँ कविता हिंदी

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Maa poem image


Poem of Mother in Hindi 



       Hello Friend's मैं Poem of Mother in Hindi मेरी ये कविता संसार कि सारी माताओं के चरणों में समर्पित कविता लेकर आया हूँ औकात नही है जो मैं माँ..लिख सकूं कितना अजीब शब्द एक अक्षर का लेकिन अपने आप मे एक अलौकिक शब्द है।

माँ को लिखने वाला मैं कौन होता हूँ जो हमे लिखी उस के बारे में मैं क्या कया लिखूं ? "माँ" ये एक शब्द ही नही है दोस्त ऐ तो अपने आप मे एक शब्दकोश हैं। जब आँखे खोली तो माँ की गोद पे ही साहारा ले रहा था उस का छोटा सा आँचल मुझ को भूमंडल से भी बड़ा था।  

माँ क्यों की माँ की पांतिया तारीफ कितन भी लिखू वो तो कमी ही होते हैं तो मैं  Mother's Day पर तो कुछ पांतिया Poem of Mother in Hindi के माध्यम से लिखी है सोचा आप सब को माँ की थोड़ी कुछ पांतिया  शेयर करने की कोशिस किया हैं।


ओ  माँ 


फिर आज मैने रात तारों को देख कर गुजारी, 
क्यूंकि  बचपन   से  जो  सुन  रहा  हूं ,
मां तो तारा बन गई है,
मैं तब से इन तारों को देखता हूं खोजता हूं,
तलाशता हूं तेरी वो मुस्कान ,
जो कभी मैंने देखी थी ,
मैं तेरी गोद में सर रख कर रोना चाहता हूं ,
मै थक गया हूं मां अब सोना चाहता हूं ,
जाने कितना भी तुझे भूलने की कोशिश करूं,
फिर भी तू हमेशा मेरे जहन में रूह की तरह समाई है,
तेरे यादों के सहारे जो जीता हूं जिंदगी ,
वो कभी कभी बोझ सी दिखाई देती है,
हां मुझे फिर तेरी याद आ रही है मां,
तू जाने क्यूं मुझे छोड़ गई ,
क्या में इतना बुरा हूं मां,
जो तू मुझ से बीच राह में ही मूंह मोड़ गई,
वापस आ जाओ ना मां,
मैं अब तुझे कभी भी परेशान नहीं करूंगा,
मैं वो दूध का गिलास पूरा खाली करूंगा ,
और अब तो मैंने फूल तोड़ना भी छोड़ दिया ,
वापस आ जाओ ना ,
मुझे बस एक बार सीने से लगा जाओ मां,


और सुनो..


वो तो बिन मांगे हमे सब कुछ दे देती थी,
भूख लगने से पहले हमें,
अपना भरपूर स्नेह देती थी,
और बदले में हम ने क्या दिया,
हाथो से बालों को खिंचा,
और पैरों से खूब प्रहार किया,
फिर भी उस माँ ने हमे जी भर कर प्यार किया,
मेरी सारी ग़लतियो को उस ने छान भर में माफ किया!!

उस की उंगलियों को पकड़ कर हम ने चलना सीखा,
..और जीवन का पहला अक्षर 'माँ' ही सीखा,
तब वो अपने आप मे मेरे लिए एक पाठशाला थी,

कभी माँ से मैंने कुछ मांगा नही,
क्योंकि बोलना हमे आता नही था,
एक हमारे रोने की आवाज़ से ही वो समझ जाती,
 क्या हमें चाहिए होता था!!

जब भी कोई सवाल मेरे सामने आता,
वो फौरन जवाब बन जाती थी,
मेरे राह के काटो को चुन कर,
वो खुद गुलाब बन जाती थी!!

जब मैं खेल - कूद कर,
थक्का हारा उस के पास आता था,
तब छान भर देंर न कर, सीने से लगाती थी,
हाये रे माँ की ममता..
चोट जब भी लगती माँ को देख
सारे दर्द मिट जाते थे,
माँ की ममता होती ही ऐसी है
कि मैत को भी मजबूर हो जाने थे!!

बेचारी माँ घर को पूरा जीवन दे कर क्या पाती थी,
पानी पीकर बचा-खुचा खा लेती और सो जाती थी,
तब अगर माँ अपमानित होती,
तो धरती की छाती फट जाती!!

फिल्मो में जो मैंने देखा वो वाकई सही था,
आज उसे मैं आप के सामने रख रहा हु,
ये बिल्कुल दृष्य वही था!!
वैसे तो मैं बहुत छोटा हुँ आप सबो से,
फिर भी एक बात कहना चाहता हु,

हर घर मे माँ की पूजा हो,
हर मन मे माँ की इज्जत हो,
ऐसा संकल्प उठाते है,
दुनिया के हर दिलो में माँ का भाव जागते है!!
और आज भी मैं अपनी माँ की आँचल में ,
वही... बचपन का स्नेह पाता हूँ


         Poem of Mother in Hindi कविता शीर्षक पर माँ की पूरी कहानी को दिखानी के कोसिस किया हैं वैसे माँ को कितना भी तारीफ करू वो तो कमी ही होता हैं फिर भी आपने तरफ से माँ की जीवन गाथा की गुण गान दिखनी की कोसिस हैं माँ एक भगवान का रूप होता हैं। तो लिखने से बता ने से पूरी तो कभी नहीं हो ती। 


मां जब तुमने बुलाया था
मैं तेरा स्वरुप बन आया था

देखकर मुझकों माँ 
तेरी आँख भर आई थी
सारी पीड़ा तुमने माँ 
पल भर में भुलाई थी

मैनें रो-रो कर उस वक़्त
तुमको मां पुकारा था
देखकर तेरी आंखे  माँ 
मुझको रोना आया था
हां मैं तेरा स्वरुप बन आया था

मिला बहुत ही सुकूं मुझे
जब गले से लगाया था
मेरे साथ साथ मां 
तेरा गला भी भर आया था

उठाकर मुझें मां तुमने
अपनी गोदी मे बैठाया था
भूख मिटाने को मेरी
अमृत रस पिलाया था
हां मैं तेरा स्वरुप बन आया था

मेरी ही खातिर तुमने
मां सुख चैन गवाया था
मैनें भी तुमको मां 
रात रात जगाया था

तेरी ममता पाकर मैनें 
खुदा को भुलाया था
तुमने भी मां मुझ पर
अपना प्यार लुटाया था
हां मैं तेरा स्वरुप बन आया था

लुटाकर कर अपना सर्वस्व 
मुझें क़ाबिल बनाया था
अपने दिये संस्करो से मां
तुमने मुझें सजाया था

मेरी खुशियों को तुमने
माँ पलको पर सजाया था
मेरी पीड़ा को तुमने माँ 
आंखो से बहाया था
मैं तेरा स्वरुप बन आया था
सभी जगत जननी मां को मेरा नम:न

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Maa kavita Photo

आज बड़े रुआंसे से स्टेटस लगाएंगे कुछ लोग
आज अपनी माँ को भगवान बताएंगे कुछ लोग
आज झूठा प्यार -सम्मान दिखाएंगे कुछ लोग
कल फिरसे उसे खरी-खोटी सुनाएंगे कुछ लोग

आज उसपे बहुत प्यार बरसायेंगे कुछ लोग,
आज उससे खूब बतियाऐगे कुछ लोग
कल फिरसे उसे अकेले छोड़ देंगे कुछ लोग
आज फूल कल झाड़ू पकड़ा देगे कुछ लोग

आज my mom is my life बताएंगे कुछ लोग
आज अच्छे अच्छे पकवान खिलाएंगे कुछ लोग
कल फिरसे उसे मुसीबत कह जायगे कुछ लोग
खाना दूर पानी तक न पिला पाएंगे कुछ लोग


माँ  मेरी  माँ 


माँ के लिए जितने भी, अल्फ़ाज़ लिखो उतना कम है,
चोट उसके बच्चे को लगी है और, माँ की आंखे नम है

खुद भूखी रहकर भी उसने, बच्चे को खाना खिलाया है
खुद खुदा ने न जाने कैसे ये, खुदा से मुझे मिलाया है

दुःख में सिर्फ माँ लफ्ज़ ही, इंसान की जुबां पे आता है
याद करते ही माँ को, वो सारे जहाँ का सुख पा जाता है

बचपन के वो सारे दिन, आज मुझे बहुत याद आते है
मेरी की हुई हर गलतियों की ढेर सारी फरियाद लाते है

बचपन में गिरते हुये कदमों को मेरे, माँ ने संभाला था,
शुद्ध घी का खाना खिलाकर, मुझे पहलवान बनाया था

लोरियाँ सुनाकर, मखमल के बिस्तर पर सुलाया था
गुनगुने गर्म पानी में मुझे, केसर डालके नहलाया था

खेलते वक्त बहुत, कांच के शिशो को मैंने तोड़ा था
अच्छे कर्म होंगे मेरे, जब खुदा ने ये रिश्ता जोड़ा था

माँ को दुःखी देख मेरे भी, आँसू आंखों से रुकते नही
माँ के अलावा किसी के, सामने हम कभी झुकते नहीं

खुदा ने माँ - बेटे का ये कैसा, अद्भुत रिश्ता बनाया है
हालात चाहे कैसे भी क्यों न हो, माँ ने वो निभाया है

माँ ने रात दिन काली मज़दूरी करके, मुझे पढ़ाया था
जहाँ दुनिया कभी पहुँच ना सके, वहाँ मुझे चढ़ाया था

लड़ सकु में दुनिया से, इतना काबिल मुझे बनाया था,
हालातों से लड़ने का, हर हुनर माँ ने मुझे सिखाया था


माँ के सपने


मैंने कभी पूछा नहीं, 
मां आज बतलाओ ना
सपनो की झलक कुछ अपने 
हमको भी दिखला ओ ना

 आज छोड़ो कल की फ़िक्र तुम
ख्वाबों के महल में अपने
हमको भी घुमाओ ना
कहीं दूर पहाड़ों पर घुमाना.
बेझिझक बेफिक्र होकर बुझाना
 पानी पुरी के ठेले पर पहेली को बुलाना.
  पुरानी बातों को दिल से सजाओ ना
 खयाल ऐसा ही कुछ रखती हो ना
गुलदस्ते में पुरानी यादों से टटोलती हो ना
मैंने कभी पूछा नहीं  ,
मां आज बतलाओ ना
सपनो की झलक कुछ अपने  
हमको भी दिखलाओ ना
चाची के हाथों से थकान पर चाय ले आना
दादाका खाना भूख लगने पर  खिलाना
चैन की नींद दादी की डांट से  सो जाना
सुबह चिड़ियों के संग  चहचाना
खयाल ऐसा ही कुछ रखती हो ना
गुलदस्ते में पुरानी यादों से टटोलती हो ना
मैंने कभी पूछा नहीं, 
मां आज बतलाओ ना
सपनो की झलक कुछ अपने  
हमको भी दिखलाओ ना
 स्कूल का वो रास्ते, टिफिन और किताबे
अव्वल होने के कक्षा में  सपने
यादों में सिमट कर बस इन रह गई हो ना
 थैले में कैद जिम्मेदारियों के हो गई हों ना
बेटी हूं तुम्हारी इतना ,  समझती हूं मां
आज बेफिक्र हो कर अपना हाल सुनाओ ना
मैंने कभी पूछा नहीं,
मां आज बतलाओ ना
सपनो की झलक कुछ अपने 
हमको भी दिखलाओ ना



      जब माँ से एक लड़िकिया पराय घर यानि की (श्रीमानजी का घर ) बिवाह की पश्चात दूर होते यानि की अलग हो कर जब जिंदगी गुजरती हैं लम्बे समय के बाबजुत भी नहीं मिलसकते हैं।   

जब  लम्बे समय का मिले हो तब एक लड़किया महिलाय माँ से मिले हो तो उस वक्त कितनी ख़ुशी, आनंद की महसूस होगा ख़ुशी की आँसू निकलेगी इसी कहानी को जोड़के Poem of Mother in Hindi पे  एक कविता बनाया हैं। आच्छ  लगे तो जरूर आपने मत देना मत भूलना।


मैं अब भी बच्चा हूँ


आज माँ से मिले बच्चों जैसा रोया हूँ मै,
माँ की गोद पर सोया हूँ मै !
सारि दुनियाँ को भूल-भूलके के,
चैन की नींद फिर से सोया हूँ मै।

मुश्किलों कि दोपहरी से मिले जो छाले थे ,
दिल पर माँ ने स्नेह के बर्फ से धोय थे ,
काँटें जंग ने जो फेकें रहें थे,
चुभे जो मेरे पांव मे गिर पड़ी थे।

पल भर मे माँ ने निकाल दिया हैं ,
गोद जो माँ कि वो पिंजरा है
रहना चाहता हर पंक्षी इसपे,
उची उड़ानों क्यों लेना जब माँ का गोद बसेरा है।

 ईश्वर से उपर मैं  क्यों ना कहुँ ,
ईश्वर भी मां के भक्ति है,
मोल न मांगा माँ ने कभी,
वो कभी नही थकती है,

मंदिर जाने से पहले क्यों ना माँ के
चरणों मे गिर जाऊं,माँ ही विश्व शक्ति है।
आज माँ से मिले बच्चों जैसा रोया हूँ मै,
जंग मे याद माँ ही दिलाती है,


        आज माँ बाप का जिंदगी कैसे गुजरती हैं उनका बच्चोको कैसे पालन पोषण करके बड़ा करने के बाद जॉब माँ बाप ढ़लती जाती हैं हमारी समाज पर पर किसी किसीने आपने बुढ़ापा उम्र के माँ बाप को घर से निकाल देते हैं।
उस वक़्त माँ बाप का दिल क्या होता हैं। सोच भी नहीं सकता इस वक़्त को Poem of Mother in Hindi कविता की माध्यम से दिखानी की कोसिस किया हैं।


माँ बाप का जिंदगी 

नाप ले रास्ता  ए  पथिक  फिर,
लौट के मत आना बीच रास्तें से ..!!
भरपूर  दर्द होती है  जिंदगी पे ,
छोड़ मत  आना आधी  रास्तें से ..!!

भागदौड़  का  जिंदगी,
वक्त  कब गुजर  गया  पता  न  चला !!
बढ़ती  उम्र  के  साथ,
ढलते  हि  सूरज  की  तरह  चला..!!

गिरते  ही,  जैसे  पथ्थर ,
टूटकर  बिखर  जाता  है !!
वैसे ही वक्त की मार से,
बिखरता में जिंदगी गया हैं !!

जिस्ने नन्हा से बड़ा करने में,
पूरी जिंदगी उसी पर गुजार दी हैं !!
बस सोचता,लफ्ज़ ख़ामोश में रहा,
हमें अब वो घर से निकाल रहे है,

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