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Hindi poem on love, हिंदी कविता संग्रह

        Hindi poem on love, हिंदी कविता संग्रह  - जब पापा कोही नोकरी पे  हो या  कोही काम का सिल-सिलापे हो २/३ सालके बाद मिले हो जिस टाइम हम छोटे छोटे होते हैं। उस टाइम पापा ने हमको मिठाई हो या कोही खिलौना गिफ़्ट लेकर आते हो उस का माहोल कितना खुश होते कितना आनंद लगता हैं। इस को हिंदी कविता, Hindi poem, Hindi Shayari , Love Shayari हिंदी शायरी की माध्यम से भी दिल की बात बोली जाती हैं।

 कि ऐसा ख़ुशी कभी नमिली हो  जिस टाइम ख़ुशीका आँसू निकलते हो उस टाइम का घर का खुशी का माहौल अलौकिक अनमोल होता है।  जब वो खुशी छीनलिया जाता हैं कोही कारण से तब उस टाइम क्या होगा ? उस टाइम का दर्द और खुसी का  ( Hindi Poem) हिंदी कविता, हिंदी शायरी Hindi Shayari का  जरिए दिखने की कोशिस किया हैं।

https://www.nepalishayari.com/2020/02/2-line-shayari-in-english-sad-and-heart.html
Hindi poem Image


Hindi Poem- हिंदी कविता 


पापा का राजदुलारा घर आया था 
उस दिन खुशियां छाई थी
घर में खुशखबरी आई थी 
नन्हा मेहमान घर आया था
पापा ने गौद में उठाया था 
पापा का राजदुलारा घर आया था
रोने की किलकारी गूंजने लगी थी
माता मेरी मुझें सुलाने लगी थी
तभी पिता को मैंने करीब पाया था
पापा ने लौरी गाकर सुलाया था
पापा का राजदुलारा घर आया था
दुनियां की सारी खुशियां मुझें थमाई थी
मेरी दुनियां तो बस पापा में समाई थी
जिन ख़्वाबों को मैंने कभी सजाया था
पापा ने उनको सच कर दिखाया था
पापा का राजदुलारा घर आया था
हर चीज मुझें छोटी लगती थी
पापा की हंसी प्यारी लगती थी
पापा ने मुझे खूब पढ़ाया था
मुझें जीने के काबिल बनाया था
पापा का राजदुलारा घर आया था
खुशियों ने फिर करवट ली थी
मेरी जिंदगी मुझसे छीन ली थी
मेरा भाग्य मुझसे रूठ गया था
पापा का साथ मुझसे छूट गया था

ऊपर वाला मुझसे रुठ गया था
हंसी की जगह खामोशी ने ली थी
खुशियां सारी दुःखमय हो ली थी
सबसे प्यारा साथ छूठ गया था
भीतर से हर कोई टूट गया था
ऊपर वाला मुझसे रुठ गया था
जीवन की नौका तैयार खड़ी थी
जो जिम्मेदारी के बोझ से जड़ी थी
उस नाव पर मैं सवार हो गया था
जिम्मेदारीयो का आगाज़ हो गया था
नई राह में जीवन मुड़ गया था
ऊपर वाला मुझसे रुठ गया था


आपको पसंद आया ? और  कुछ कमजोरियाँ हो होगा तो जरूर आपने राय लेखियगा। आपके पास भी ऐसा कविता  हिंदी शायरी हैं तो जरूर बताइए।


इस कविता मैं एक दुःखी, गरीवी वयाक्तिको हिंदी कविता , Hindi Poem का माध्यम से उसका दिलका दुःख को उजागर करने का कोशिस किया हैं। आपको भी अच्छा लगे तो जरूर कमेंट करके हौसला बढ़ा सकते हो।

https://www.nepalishayari.com/2020/02/do-not-you-value-her-do-not-value-her.html
Hindi poetry


Hindi poem - क्यों मैं रोता ही यहता हूँ ?


हरपल क्यों मैं, रोता ही रहा हूँ।।
दियें बुझ गए सारे, अब हो गया अंधेरा,
अपना न दोस्त, अब कोई नही है मेरा,
किसके लिए आख़िर?, मैं जीता ही रहा हूँ,
मैं सब-कुछ क्यों? खोता ही रहा हूँ,
हरपल क्यों मैं ,रोता ही रहा हूँ।।
 हँस रहा है अब तो, मेरे ये सारा ज़माना,
मुझें क्या दुःख है, ये किसी ने कभी न जाना।
ख़ामोश-सा चेहरा लेकर, फिरती ही रहा हूँ,
सब-कुछ क्यों मैं, खोता ही रहा हूँ,
हरपल क्यों मैं  रोता ही रहा हूँ।।
रास न आये ये तौर-तरीके, ये सर्द-फ़िज़ाये,
छुपाती मेरे अश्कों को ये सावन की घटाएं,
हरदम ग़मो को अपने छुपाता ही रहा हूँ,
सब-कुछ क्यों मैं  खोता ही रहा हूँ,
हरपल क्यों मैं  रोता ही रहा हूँ।।


Hindi shayari  हो या  Hindi poem  इसका छंद कुछ अलग होता हैं इस Hindi Poem (हिंदी कविता )में एक नारिका दर्द को उजागर करने के लिए कोसिस किया हैं आपको भी पसंद आया तो जरूर बताना।  जब एक अबोला नारी दुःख से पीड़ित हैं। और उसका दिल का अंडर से ही मैंने कुछ करके दिखाऊंगा बोलकर दिलका अण्डर से ही जाग ता हैं तो इस प्रकार देखती हैं Hindi Poem का जरिए वो चीज को दिखने का कोशिस किया हैं।


Hindi Poem - वो नारी अपना दर्द कुछ यूं बतलाए


कभी डरी हुई, कभी घबराए ,कभी जख्मों को छुपाए,
रखने को मान सभी का, हर दर्द वो सहती जाए ।

ये विश्व उसे माने दुर्गा कभी लक्ष्मी का स्वरूप कहे
फिर इतने जख्मों को सहकर ,वो दुर्गा क्यों बस चुप सी रहे?

सबका मान वो रखती है ना मान उसे कोई देता है
आराध्य वो तेरी, विश्व बता ,क्या ये मां पूजा बस धोखा है?

वो ख़ुद को अब पहचानी है ,तू उसको मत पहचान बता
ऐ विश्व तुम्हारा हो अहसान ,ना मान पर उसके प्रश्न उठा।

वो रचती है वो रच लेगी ,इतिहास बड़े वो गढ़ लेगी 
तू कदम बढ़ा उसकी खातिर ,वो लक्ष्य को अपना कर लेगी।

ये अत्याचार ये दुर्दशा बस भी करो अब बहुत हुआ,
तू ज़मीं तो दे उसकी खातिर ,वो स्वर्ग बनाकर रख देगी।

वो नारी है वो सब कुछ कर लेगी 


            एक कोशिस हैं जब बसंत ऋतु आता हैं तब उजागर पतझर पेड़ पत्तियां फूलोंसे भरी हुए चारोतरफ हरियाली होता हैं जंगलो मैं रहने वाला कोयल चिड़िया पंछी का खुशिया आती है चिरबीर चिरबीर आवाज चारो तरफ हरियाली की बिच कुछ मजा आनन्द अलगसा होता हैं उस चीज को Hindi Poem  (हिंदी कविता) का जरिए  समेटने की कोसिस किया हैं। पसंद आया तो बताना नभुले।

Hindi poem- एक कोशिश

बसंती रंगो में लिपट कर
ये धरती संवरने लगी
हुआ बसंत का आगमन
खुशियों की सौगातों से
गूंज उठी ये धरती
कोयल की मधुर तानों से
सुनकर गीत मोर नाच उठे
मेघों की जुबानों से
पक्षियों के कलरव से
धरती झुमने लगी
बसंती रंगो में लिपट कर
ये धरती संवरने लगी

नव कोपलें फूट पड़ी 
विरानी शाखाओं से
धरती का आंचल सज गया
सरसों के पीलें पुष्पों से
सराबोर हो गया पेड़ आम का
बौरों के गुच्छों से
छाई तरुणाई कलियों में 
वो अठखेलियां करने लगी
बसंती रंगो में लिपट कर
ये धरती संवरने लगी

चुनरी पहनी हरियाली 
जिसमें टांके लगे सितारो से
पहना घाघरा समुंदर सा
जो फैल रहे फंवारौ  से
सुगंधीत पहनी बाजू बिछियां
जो महक रहे गुलाबों से
पहना मुकुट हिमालय सा
जो जड़ा हुआ नगिनों से
सजकर प्यारी धरती देखो
दुल्हन सी लगने लगी
बसंती रंगो में लिपट कर
ये धरती संवरने लगी

              एक कविता हैं जिसमें एक माँ का दुःखको लेकर बच्चोको देखना, काम करना,खिलाना, घरका काम सारी कितना काम होता हैं।  फिर भी आप्पने बच्चोंको मर भी लेती है कभी कभी घुस्सा भी कर लेती हैं पर उस से ज्यादा बच्चो हर माँ का कलेजा होता हैं रूठी बच्चोंको गले लगाके चुप्पी लेता हैं समालती हैं उसको Hindi Poem , Hindi shayari से दिखानी की कोशिस किया हैं पसंद आया तो आपने मत देना नाभूलिएगा।


Hindi Poem - माँ का दिल 


मां बुरी है मुझे मारती है।
ये कहकर वो मां के गले लग गया।

मां और रब एक ही है।
शायद उसे पता लग गया।

इन ख्वाहिशों से वफ़ा मुश्किल है जनाब,
ये इतना रंग बदलती हैं।

इतने गुज़रे मौसम ना यहां,
जितना ये हरपल गुजरती हैं।

इनकी खातिर ही इस समाज का
मानव मानवता भूला है।

समझ रही मैं बहुत खूब 
ये कारण सारे दुःख का है।

ख्वाहिश की नगरी ने देखो
रिश्तों को पाक ना छोड़ा है।

इन बदली हुई ख्वाहिशों ने 
जाने कितनों का दिल तोड़ा है।


             जिंदगी की एक कहानी को बताने की कोशिस किया हैं हर आदमियों को कोही न कोही मुश्किल को सामना करना पड़ता हैं कभी सुःख कभी दुःख हर आदमियों को जीबन पे बेतित करना ही पड़ताहै उस चीज को दिखाने की कोसिस किया हैं। तो पढ़ लीजिय Hindi Poem (हिंदी कविता) और  Hindi shayari इस प्रकार हैं।


Hindi Poem - "कहानी ज़िन्दगी की"


शहर में थी उजालों के, एक रोज़ ज़िन्दगी आई
हौसला थी बड़ा था उसमें, थोड़ी सी वो घबराई
एक रंग के होते सभी थे, जिधर भी देखती थी वो
 बिखरी ज़मी पे हरियाली, गगन पे बसन्ती छाई
बढ़ा कर हाथ उसने भी, कुछ रंग समेटने चाहे
उस उजाले में अचानक, काले मेघ घिर आये
जो एक रंग के वो दिखते थे, पहले उजालों में
फिर न जाने उनमे से कितने, सारे रंग  गहराये
दिखता था कोई केसरिया, कोई हरा कोई नीला
सब ने फिर उसे भी रंगने को, अपना खेल था खेला
मगर ख्वाहिश थी उसकी तो, कि वो हर रंग अपनाये
अगर रंगती एक रंग में तो, वो बेरंग हो जाती
तो भाग जाने को उसने फिर, अपने पंख फैलाये
नोच डाला सभी नें, फिर हुए टुकड़े कई उसके
अब भी दफन हैं कई, कुछ बने अब राख हैं उड़ते
हुए खुश बहुत फिर वो सब,जो एक रंग में रंगी थी वो
केसरिया हरा था न था ,लाली से सजी थी वो
मगर ज़िन्दगी ने फिर भी, अपना जादू दिखलाया
फिर एक नन्हा उसकी कब्र पर, पेड़ खिल आया
उगते थे उसमे फूल  हर एक रंग के बिना डर के
लौटी ज़िन्दगी एक रोज़  उस शहर में फिर से
गुलसितां बन चुका था पौधा, अपने फूल बिखराके
ज़िन्दगी रहती है अब  उन रंगबिरंगे फूलों में
हर रंग अपना है जहां, जहां सब लोग अपने हैं।


           जब एक प्रेम और प्रेमिका का गहिरा रिस्ता लव पे सुःख-दुःख विताते हैं सबकुछ जिंदगीकी की एक साथ जीने मर्नेकी कसम लेलेतेहैं जिंदगीका मजा  ही  कुछ अलग़ होता हैं सभी चीजों को भूल जाता हैं इतना गहिरा रिश्ता विताते हैं।
पर कारण बस एक से धोखां  होता हैं तो उस टाइम हालात क्या होगा कितना दुःख को सामान करना पड़ता हैं उसी टाइम को Hindi Poem कविता का जरिए दिखानेकी कोसिस किया हैं।


Hindi Poem - मुझे बहुत कुछ कह जाती है


 मुझे तेरी याद, हरवक्त बहुत सताती है;
रूठ जाऊ तो, वो मुझे मनाती है..!!
भले तुम ही मुझसे, कुछ ना कहती हो;
पर खामोशी, बहुत कुछ कह जाती है..!!

गहरे ज़ख्म भले,खामोशियाँ देती हैं,
पर रात को,नींद तो आराम से आती है..!!
ये बात क्यूं  बताती नहीं..? मोहोंब्बत है हमसे
यूँ खुद को तू तड़पाती है..! बिछड़ कर मुझसे

नाराज हूँ में तुझसे खुद से ही खुदको बताती है
 हमसे इश्क़ है या फिर, यूँ ही मुझपे हक जताती है!
गहर इश्क़ है तो,जल्दी से इजहार कर दो;
ये खामोशियाँ से , हमें बहुत रुलाती है..!!

न जाने क्यों फिर भी ,तू इतनी याद आती है;
तन्हाई में तेरे बिना, ये शाम भी ढल जाती है..!!
फिर रात को ,ख़्वाब में तू आती है;
पलके मेरी भिगाकर, तू चली जाती है..!!

सिलसिला ये , कब तक चलेगा..??
आती है तू बेवक्त और, मुझे परेशान करती है..!!
अब रहने दे , तुझसे कुछ नहीं सुनना;
खामोशियाँ तेरी ये, मुझे बहुत कुछ कह जाती है..!

Hindi Poem , Hindi Shayari आपको भी पसंद आया तो अपना मत देना मत भूलना आपको एक मत से हमको प्रत्साहन मिलजाता हैं कन्जूसी मत करना बताना हम फिर ऐसा ही हिंदी लेकर आउंगा धन्यवाद। 


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