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Motivational New Mothers Day Shayari in Hindi - हिंदी शायरी

Mothers day quotes in Hindi


दोस्त आजा माँ के लिए छोटी सा Mothers Day shayari in Hindi पर अपना दिलकी बाते को लिखकर बतानेकी कोशिस किया हैं वैसे माँ को किता न भी तारीफ करू वो तो कमी हो जाती हैं। 

माँ एक भगवान की रूप होती हैं माँ आपने जिंदगी कैसे कैसे आपने जिंदगी गुजरती हैं भूका रहके भी आपने बच्चोको खिला लेती हैं। कितने मुस्किलो के बाबजुत अपने बच्चोंको को बड़ा तो बना देती हैं फिर भी वो बच्चे आपने माँ को देखती ही नहीं कितने बच्चों लोग इस धर्ती पर हैं। 

आपने माँ को बृद्धा आश्रम पर भेजकर बड़े बड़े बाटे करके चलरहा होता हैं। अपने माँ बाप को आँखो पर आँशु देकर छोड़ देते हैं बहुत लोग मिलता हैं जीने पालन पोषण करके कितने दुःख करके बड़ा बनाया वही बच्चों ने सहारा देनेकी बजय घर से निकल देती हैं। 

मुबारक   हो   तुम्हे   माँ   मुबारक  हो 
इस दिन तारीख सुबह ही मुबारक  हो 

चाँद सितारे  तरह चमकते रहे किस्मत 
माँ के दिन  सदा रहे आपकी  मोहब्बत 

जिन्दगी भर खुशियो की कमी न रहे 
माँ बाप का बच्चों का  प्यार साथ रहे 

दुआ  है  रब से  यही  इल्तिजा  सदा  रहे  
परेशानिया दुःख दर्द सात समुद्र पार रहे

मुबारक हो तुम्हे माँ  मुबारक साद खुसी मिले  
फिरसे ऐसाही दिन मुबारक दिन  केहनेको मिले 

बचपन से बड़े तक 


पाहिले धड़कन तेरे भीतर ही धड़क रही थी 
तुम्हारी पेटपर लात मरकर खेल रही थी 

जब आँख खुली सबसे पहिला तेरी ही चेहरा दिखा 
जिंदगी पर जीनेका चलनेका तरीका तुमसे ही सीखा 

सुर पर सुर मिलाना खामोशी जुबान को तुम ही सिखाया  
स्वेत पड़ी मेरा  इच्छा  को रंगों से तुमने ही  भर दिया.

अपना भूखको छोड़कर मेरा ही खातिर तुमने भंडार भरा 
भले कमजोर रही फिर भी मैं होने का तुमने अहंकार भरा

रातको छिप-छिप कर जब  अकेली में रोया करती थी
मुझे भी दर्द होता था सिस कियां मैंने भी सुनी थी.

मैं समझना न सका तुम्हरी दुःख मुझे इतना ध्यान नहीं था
सब थोक तू ही थी जो मेरा भूख प्यार का पता था 

जब मैं किचड़ धूल पर खेला करता था 
तेरे चूड़िया पायलको आवाज से डर लगता था.

दर था तू आएगी डाटेंगी कान पकड़कर मुझे ले जाता 
आज भी मुझे माँ  किसी दिन धूल धूल सा लगता

मन करता हैं तेरी चूड़ियों डाटें सुननेको मन करता हैं 
 तू आजा डांट ,कान पकड़कर मुझे ले जा दिल करता हैं

तेरे लोरियों  कहानियोंको सुनकर एक पलके सोया करती थी 
तेरे स्पर्श के बेगार ये आँखे जगा नहीं करती थी 

मुलायम तेरी हाथो को अब घिसनेकी नहीं चाहती हूँ 
पूरा कोसी है तेरे सपनों चाहत पूरा करना चाहती हूँ 

Maa shayari image
Maa Shayari image

 मेरी माँ

जब पहली बार आखें खुली वो थीं, 
जब पहली बार चोट लगी वो मरहम थीं! 
जब इश्क़ हुआ वो साथ थीं, 
जब मौत आई वो हमेशा मुझसे आगे थीं! 
वो कोई और नहीं मेरी माँ थीं!


पूछूँगा

ज़िंदगी मिले तो कुछ सवाल पूछूँगा,
कुछ अपना कुछ उसका हाल पूछूँगा,
वजह क्या थी हमसे दूर होने की,
देते थे जो जीने-मरने की वो मिसाल पूछूँगा


जीवन की परि भाषा

कभी जीने की आशा,
कभी मन की निराशा,
कभी खुशियो की धूप,
कभी हकीकत की छांव,
कुछ खोकर कुछ पाने की आशा,
शायद यही है जीवन की परि भाषा…


बदल गए हम

"तकदीर ने जैसे चाहा ढल गए हम, 
यूं तो संभल के चले थे फिर भी फिसलगए हम.
अपना यकीं है की दुनिया बदल गयी,
पर सबका ख्याल है के बदल गए हम.


कह जायें!
जो आँखों से बह जाए  वो दर्द ही क्या   !    
जो होठों पर रह जाए वो खुशी ही क्या   !    
कभी तो समझो मेरी खामोशी को    !
जो लफ्ज़ आसानी से कह जायें वो बात ही क्या  !


 देते है

दीवानगी हमारी हर राज खोल देती है,
खामोशी हमारी हर बात बोल देती है।
लेकिन शिकायत है तो सिर्फ इस दुनियावालों से,
जो दिल के जज़्बात भी पैसों से तोल देते है।


Emotional Shayari

हमसे पूछिए

सिसकती हुई ज़िन्दगी का मजा हमसे पूछिये, 
दो दिन के प्यार में जो मिली वो सजा हमसे पूछिए,
क्यों फिरते हो उदास तुम इस गम की तलाश में,
गम की हर गली का पता हमसे पूछि
ए।


 कर ली 

नज़र ने नज़र से मुलाक़ात कर ली
रहे दोनों खामोश पर बात करली
मोहब्बत की फिजा को जब खुश पाया
इन आंखों ने रो रो के बरसात कर ली ..


Birthday Shayari in Hindi


मुबारक हो

जन्मदिन के ये ख़ास लम्हें मुबारक, 
आँखों में बसे नए ख्वाब मु
बारक, 
जिंदगी जो लेकर आई है आपके लिए आज,
वो तमाम खुशियों की हंसीं सौगात मुबारक हो, 


संबंध

   रिश्तों में वैसा ही संबंध होना चाहिए…
जैसे हाथ और आँख का होता है।
हाथ पर चोट लगती है, 
तो आँखों से आँसू निकलते हैं…
और आँसू आने पर हाथ ही 
उनको साफ करता है…!!


बिगड़ जाता

सीखा नहीं जिंदगी को जीना
  आज भी हल्का सामुस्कुराता हू.
सब तो हसीन है मेरी दुनिया में
बस कोई तेरा नाम ले तो बिगड़ जाता हूं

रिस्ते

"डिलीट"  जितना तेजी से होता है ,
उतनी तेजी से "डाऊनलोड" 
नही होता,
क्योकि ..समय "सर्जन" में ही 
लगता है "विसर्जन" में नही, 
वो चाहे कोई "एप्लिकेशन" 
हो या फिर "रिश्ते".
"रिस्ते" तोड़ने से पहले 100 बार सोचे


पछतायेगा कौन

अगर मैं रूठा और तुम भी रूठ गए,
तो फिर मनाएगा कौन.. ❤️

छोटी बात को लगा लोगे दिल से,
तो फिर रिश्ता निभाएगा कौन...

दुखी मैं भी और तुम भी बिछड़कर,
सोचो हाथ फिर बढ़ाएगा कौन...

न मैं राजी, न तुम राजी,
फिर माफ़ करने का बड़प्पन दिखाएगा कौन...

डूब जाएगा यादों में दिल कभी,
तो फिर धैर्य बंधायेगा कौन
...

एक अहम् मेरे, एक तेरे भीतर भी,
इस अहम् को फिर हराएगा कौन...

ज़िंदगी किसको मिली है सदा के लिए,
फिर इन लम्हों में अकेला रह जाएगा कौन..

मूंद ली दोनों में से गर किसी दिन एक ने आँखें,
तो कल इस बात पर फिर पछतायेगा कौन..

कहते हो

मैं जमीं से जुड़ा हूँ तुम फलक की बात करते हो
अंधेरा तुममें शामिल है और बेवजह रात कहते हो
कहने को तो ये मिलना भी है तारीफ के काबिल
सूरत देखने भर को ही बस मुलाकात कहते हो

क्या खूब है ऐ खुदा तुम्हारी नासमझी की सरहदें
गिरी दो बूंद जो तुम सावन की भरी बरसात कहते हो
सम्भाले नहीं जो टुकड़े वो अब दिल पे घाव कर रहे हैं
अपनी बेपरवाही को तुम बिगड़े हुए हालात कहते हो


न करे


रब किसी को किसी पर फ़िदा न करे,
करे तो क़यामत तक जुदा न करे,
ये माना की कोई मरता नहीं जुदाई में,
लेकिन जी भी तो नहीं पाता तन्हाई में।


रहेगी


यादों से ज़िन्दगी खूबसूरत रहेगी,
निगाहोमे हर पल ये सूरत रहेगी,
कोई ना ले सकेगा कभी आपकी जगह
हमेशा आपकी ज़रुरत रहेगी,


दोस्त पुराने


अब ना मैं हूँ,...ना बाकी हैं ज़माने मेरे ....!!!
और...ना ही मशहूर हैं, 
टेलीग्राम पर कोई,....खास फ़साने मेरे...!!!
ज़िन्दगी है, तो,...नए ज़ख्म भी लग जाएंगे !!!
लेकिन,,,अब भी यकीं हैं,कि बाकी हैं,,,,,
कुछ दोस्त पुराने मेरे....!!!


एहसास

दिल के टूटने से नही होती है आवाज़!
आंसू के बहने का नही होता है अंदाज़!
गम का कभी भी हो सकता है आगाज़!
और दर्द के होने का तो बस होता है एहसास!


इंसान थ

एक दिन निकला सैर को,,
मेरे दिल  म कुछ अरमान थे,!!
एक तरफ थी झाड़ियाँ..
एक तरफ, श्मशान थ,!!
पैर तले इक, हड्डी आई,,
उसके भी यही बयान थ,!!
चलने वाले संभल कर चलना,,
हम भी कभी इंसान थ।।

दिल के करीब 

मेरे प्यार की महफ़िल  में तू आजा जरा,
दर्द बड़ा महंगा है मेरा

इसकी क़ीमत लगाना 
तू भूल जा,,

अपने दामन की सरगोशी 
में समेट ले,

मेरी भीगी पलको को पोछ
मुझे हँसा ज़रा,,

आँसू बहाये है बहुत 
अब मुझे चुप करा,

हार चुकी हूँ हर बाजी
अब मुझे तू जिता ज़रा,,

मेरी सारी नाकामी को रख तू
मुझे अब कामयाब बना,

बहुत राते काटी है तेरे इंतजार में
आ सिर रख मेरा अपनी गोद मे,,

अब मुझे प्यार से 
सुला जरा,

बहुत तरसा है दिल

होंठो पे अपने अब कोई 
प्यार की बात ला,,

मुझे सताना छोड़ अब मुझे
मनाने की कोई बात ला,

रूठ के कबसे बैठी हूँ 
अपने दिल से,

आ अब मेरे दिल को 
अपने दिल के करीब 
ला जरा...!!!


मरते हैं

एक आपही  से प्यार करते हैं.
दिल को आपका तलब गार करते हैं
बस आपकी निगाहों का इंतजार है सनम
आप निगाहें तो झुका लीजिए.
हम क्या आपके एक इशारे पर तो हजार मरते हैं


इश्क़ लड़ाते हैं

हुस्न धतूरा दिल मंजीरा चल...
धूनी रमाते हैं
शाम सुहागन रात बंजारन चल...
चिल्लम जलाते हैं
मन बनारस तन बनारस चल...
इश्क़ लड़ाते हैं


https://www.nepalishayari.com/2020/05/dosti-shayari-in-hindi.html
Sher shayari photo


बात होती


दिल से दिल की रूहानी मुलाक़ात होती…
तुम अपने होते तो क्या बात होती.

हा मेने उनसे बोला आपसे मोहब्बत करती क्या हया होती…
वो सुक्रिया बोल कर पीछे हठ गए फिर क्या बात होती…

अज़ीज़ है तुम्हारी पर्दादारी भी
पर खुलके बोलते मोहब्बत है तो क्या बात होती…
तुम दूर होके भी होते हो क़रीब
सोचो पास होते तो क्या बात होती…

लफ्ज़ों की जरूरत ना थी रिश्ते को
ख़ामोश रहते फिर भी खूब बात होती…


समझना

गुलाब है दिल के हम  हमे काटे ना समझना
बस वायदे हैं दिल के हमारे  वादे ना समझना.
हमें देखने से आलम ना बदल पाएगा हमें जानना है
तो पहले हमारी खामोशी समझना  है


अहसास करा रही है

औपचारिकताएं बची है मजबूरी में बाकी दिलों से संबंध तोङे जा रहे हैं, 
जग में सिर्फ नाम के रिश्ते रह गये हैं बस मतलब के रिश्ते जोङे जा रहे हैं

 कहाँ गये वो स्नेह भरे रिश्ते सारे जो सिर्फ दिल से निभाए जाते थे, 
कहाँ गये वो प्रेम भरे बंधन सारे जो प्राणों के साथ बंधाए जाते थे

 नहीं भुलाए जाते वो गर्मीयों के दिन  जब छुट्टियों में नानी के घर जाया करते थे, 
गली मोहल्ले के सारे बच्चे हुङदंग मचाया करते थे

केरम शतरंज ताश लुकाछुपी से मन बहलाया करते थे , 
खूब होती धमाचोकङी मस्तियाँ लङते झगङते मनाते थे

सुबह उठकर शैतानों की टोली  तालाब के किनारे चले जाते थे, 
पत्थर फैंक फैंक कर पानी में गोला बनाने की होड़ लगाते थे

गिल्लीडंडा सितोलिया मारधङी से गांव की गलियों में शोर मचाते थे,  
कंचे लट्टू दिन भर हाथों में रहते थे माचिस की खाली ङिब्बियों से रेल बनाते थे

आज बढ रही है खाइयां आपसी दिलों की यह क्यों नहीं कोई समझ पा रहे , 
गिर रहे रिश्ते रिस्तों की नजर में और रिश्ते यूँ ही बिखेरते जा रहे हैं

 उस समय तरबूज खरबूजे और आमों की जमकर सब दावत उङाते थे, 
पत्थर वाली लाल कुल्फी खाकर  गर्मी में ठंङक का आनंद मनाते थे

नहीं भुलाए जाते वो बचपन के दिन रह रहकर स्मृति में आते हैं, 
जब भी गर्मी के दिन आते हैं तो पुरानी यादों को ताज़ा कर देते हैं 

यह उस कयामत की आहट है जो चुपके चुपके कदम बढा रही है, 
आज ये रिश्तों की बदलती यह परिभाषा विनाश का अहसास करा रही है



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