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New two Line Shayari Collections in Hindi , प्यार की शायरी हिंदी में

2 Line Shayari Collections in Hindi 


इस 2 Line Shayari Collections in Hindi पर आज हर तरह का शायरी को समेटकर आपके पास लेकर हाजिर हैं। सभी को पसंद वाली 2 Line Shayari Collections in Hindi पर आपको दिल चाहा शायरी देने की कोसिस हैं वैसे इस पर एक कविता भी सामेल किया हैं। 

हम सब फरक -फरक सोच बिचार धराय का आदमी हैं हर व्यक्ति का पसंद एक जैसी नहीं होता इसी बजह से हम सभी प्रकार के शायरी, कविता, ग़ज़ल को लेकर मिश्रित विधाको choose किया हैं। 

प्यार पर करने वाला प्यार दिने वाला धोका पाने वाला  धोका दिने वाला और motivation का बिभिन्न बिचर को समेत कर 2 Line Shayari Collections in Hindi तैयार किया हैं आपको किस प्रकार के पसंद हैं हमको बताना नाभूले। 

https://www.nepalishayari.com/2020/04/beautiful-hindi-love-shayari-collocation.html
Love Shayari Image

Hindi Shayari Collection - शायरी संग्रह


याद आने लगे

हर रात रो-रो के उसे भुलाने लगे
आंसुओं में उस के प्यार को बहाने लगे
ये दिल भी कितना अजीब है कि
रोये हम तो वो और भी याद आने लगे

मेरा नाम लिखा है

गुलशन की बहारों पे सर-ए-शाम लिखा है,
फिर उस ने किताबों पे मेरा नाम लिखा है,
ये दर्द इसी तरह मेरी दुनिया में रहेगा,
कुछ सोच के उस ने मेरा अंजाम लिखा है


चला गया।

चाहा था जिसको टूटकर आखिर चला गया,
इस दिल मोहब्बत का मुसाफिर चला गया,
बेरंग आज तक है ये तस्वीर प्यार की,
पूरा किये बगैर दिल से हमसफर चला गया।

देखा है!

लोग कहते हैं इश्क़ एक धोखा है,
हमने सुना ही नहीं आज़मा के देखा है,
पहले लूट लेते हैं प्यार में जान तक,
फिर कहते हैं कौन हो आप? आपको कहीं देखा है!

मगर अब नहीं।

कभी मैं भी तेरी मोहब्बत के नशे में था,
मेरी आँख में भी खुमार था, मगर अब नहीं,
कभी ये दिल बाग़-ओ-बहार था, मगर अब नहीं,
तेरा ज़िक्र वजह-ए-करार था, मगर अब नहीं।

जहाँ जायें जिधर जायें।

तेरी दुनिया में जीने से तो बेहतर है कि मर जायें,
वही आँसू, वही आहें, वही ग़म है जिधर जायें,
कोई तो ऐसा घर होता जहाँ से प्यार मिल जाता,
वही बेगाने चेहरे हैं जहाँ जायें जिधर जायें।

चला जाऊंगा।

आखिरी बार तेरे प्यार को सजदा कर लूं,
लौट के फिर तेरी महफ़िल में नहीं आऊंगा,
अपनी बर्बाद मोहब्बत का जनाज़ा ले कर,
तेरी दुनिया से बहुत दूर चला जाऊंगा।

बना लेता है।

अफसोस होता है जब
हमारी पसंद कोई और चुरा लेता है,
ख्वाब हम देखते हैं और
हकीक़त कोई और बना लेता है।

ज़ख्मों से डरने लगी है।
अब तो तबियत हमारी बिगड़ने लगी है,
कोई चाहत जो हमसे बिछड़ने लगी है,
आरज़ू जो कोई दिल में दबी रह गयी,
अब बन के धुआँ कहीं उड़ने लगी है,
हर अक्स तेरा दिल की गहराई में है,
रूह दिल के ज़ख्मों से डरने लगी है।
आदत नहीं रही।

कुछ मैं भी थक गया उसे ढूँढ़ते हुए,
कुछ ज़िन्दगी के पास भी मोहलत नहीं रही,
उसकी हर एक अदा से झलकने लगा खलूस,
जब मुझको ऐतबार की आदत नहीं रही।

मिटाना रहा।

मोहब्बत में न अपना कोई ठिकाना रहा,
सारी उम्र बस उनका आना-जाना रहा,
हमने राज खुलने न दिए दिल के उनपर,
खतों में हर्फ़ का लिखना मिटाना रहा।

मगर मेरी दुआ है

मैं किसे सुना रहा हूँ ये ग़ज़ल मोहब्बतों की,
कहीं आग साजिशों की कहीं आँच नफरतों की,
कोई बाग जल रहा है ये मगर मेरी दुआ है,
मेरे फूल तक न पहुँचे ये हवा तज़ामतों की।

नजर आता है।
आइने में अक्सर जो अक्स नज़र आता है,
खुद से लड़ता हुआ एक शख़्स नज़र आता है,
वो किसी बात पे खुद से खफा लगता है,
नाकाम मोहब्बत का नक्श नजर आता है।
अच्छी नहीं लगती।

बिछड़ कर आप से हमको ख़ुशी अच्छी नहीं लगती,
लबों पर ये बनावट की हँसी अच्छी नहीं लगती,
कभी तो खूब लगती थी मगर ये सोचते हैं हम,
कि मुझको क्यों मेरी ये ज़िन्दगी अच्छी नहीं लगती।

मेरे हाथ में नहीं।

तेरे सिवा कोई मेरे जज़्बात में नहीं,
आँखों में वो नमी है जो बरसात में नहीं,
पाने की कोशिश तुझे बहुत की मगर,
तू एक लकीर है जो मेरे हाथ में नहीं।

देखते है

नींद पिछली सदी से जख्मी है
ख़्वाब अगली सदी के देखते है
नींद पिछली सदी से  जख्मी है
ख्वाब अगली सदी के देखते
बारिशो से तो प्यास बुझती नही
आइए जहर पी के देखते है

सिंदूर होगा।

तेरे चेहरे में मेरा नूर होगा…
फिर तूँ ना कभी मुझसे दूर होगा
सोच क्या ख़ुशी मिलेगी जान उस पल…
जिस पल तेरी माँग में मेरे नाम का सिंदूर होगा।

रहा था वो।
तलाश मेरी थी और भटक रहा था वो,
दिल मेरा था और धड़क रहा था वो।
प्यार का ताल्लुक भी अजीब होता है,
आंसू मेरे थे और सिसक रहा था वो।
सीखा  दिया

मेरे  दिल  की  धड़कनो  को
तूने  दिलबर  धड़कना  सीखा  दिया ,
जब  से  मिली  है  मोहब्बत  तेरी  मेरे  दिल  को ,
गम  में  भी  हंसना  सीखा  दिया

मोहब्बत हमारी सांसो में हैं।

आपकी परछाई हमारे दिल में है,
आपकी यादें हमारी आँखों में हैं,
आपको हम भुलाएं भी कैसे,
आपकी मोहब्बत हमारी सांसो में हैं।

बहुत याद आती है

तुझसे बिछड़े कई साल हो गए
हम तेरी याद में बेहाल हो गए
अब तो आजा तूँ मेरे पास
तेरे बाद बहुत आये पर तूँ थी खाश
अब अकेले की हसरतें ख़ुद को खाती है
ए बिछड़ने वाली तेरी बहुत याद आती है

सबकी खैर लिखता हूँ

ना ग़ज़ल ना शैर लिखता हूँ
क्या लिखूं अपना सब गैर लिखता हूँ
लिखता हूँ भाईचारा नही किसी का बैर लिखता हूँ
शायर कहते है सब इसीलिए सबकी खैर लिखता हूँ

नन्हा मुन्ना कोरोना।।

वो कौन था जो हाथ मिला कर निकल गया
बरपा हिसार-ए-जिस्म में कोहराम क्यूँ हुआ
सबके पीछे पड़ गया है एक खतरनाक बौना
भयानक बाहुबली नन्हा मुन्ना कोरोना।।

मजबूरकिया।

दुनिया तो हम से हाथ मिलाने को आई थी
हम ने ही एतिबार दोबारा नहीं किया
कोरोना जी ने छीन लिया लड़कियों का नूर।
मेकअप को छोड़, मुंह ढकने को मजबूर।।

पुकारा नहीं उसे।

एक नजर भी देखना गंवारा नहीं उसे,
जरा सा भी एहसास हमारा नहीं उसे,
वो साहिल से देखते रहे डूबना हमारा,
हम भी खुद्दार थे पुकारा नहीं उसे।

 संभल जाते हैं।

मिल भी जाते हैं तो कतरा के निकल जाते हैं,
हैं मौसम की तरह लोग... बदल जाते हैं,
हम अभी तक हैं गिरफ्तार-ए-मोहब्बत यारों,
ठोकरें खा के सुना था कि संभल जाते हैं।

खुश नसीब होगा

ना जाने वो कौन तेरा हबीब होगा,
तेरे हाथों में जिसका नसीब होगा,
कोई तुम्हें चाहे ये कोई बड़ी बात नहीं,
लेकिन तुम जिसको चाहो, वो खुश नसीब होगा

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Hindi Shayari image

ये हमारी नादानी थी

बची ना जब देश में कोई देश की निशानी थी
तभी शहीदों ने दी कुर्बानी थी
ऐसा था मेरा देश शमा भी लौ की परवानी थी
उनकी बातों को भूल गए ये हमारी नादानी थी

ऐसा आतंक झेलना पड़ेगा

आंसू  की हर बूंद में तेरी तस्वीर बन जाती है....
पर ये बात इन सियासी दलों को कहाँ समझ आती है...
अब नक्सलवाद के खिलाफ सभी को एक होना पड़ेगा....
नहीं तो हर-बार सिर्फ मासूमों को ऐसा आतंक झेलना पड़ेगा....

सिखा दे

थमे हुए दिल को मचलना सिखा दे
ये इश्क़ है जो पानी पे चलना सिखा दे
न रहे कोई असीर क़फ़स में जहाँ के
ये खिज़ाओं में भी सावन सा फलना सिखा दे

मेरी नज़र

सिमट जा मेरी बांहों में इस कदर
कि तेरी नज़र में हो बस मेरी नज़र

चूम लूँ बेतहाशा तेरे रुख़सार गुलाबी
कर सबर ज़रा सा दो पल को ठहर

माँ का दिल❤️...

माँ का दिल है मुफ्त में मिलता है,
प्यार-लाड़ माँ का मुफ्त में मिलता है।

रहती है जब तक साथ इंसान कुछ नहीं समझता है,
बिछड़ जाने पे माँ का प्यार याद आता है।

जन्नत क़दमो में है उसकी हर कोई जानता है,
फिर भी जीते जी क़द्र ना उसकी करता है।

खुद रहे लाख दुःख में

माँ पर अपनी औलाद की खातिर सब सहती है,
अपने लाल की खातिर दुनिया से भी लड़ती है।

माँ का दिल है मुफ्त में मिलता है,
प्यार-लाड़ माँ का मुफ्त में मिलता है।

निकाली नहीं जाती

दिल की हालत बताई नहीं जाती,
हमसे उनकी चाहत छुपाई नहीं जाती,
बस एक याद बची है उनके जाने के बाद,
वो याद भी दिल से निकाली नहीं जाती

मजबूर कर दे"

"आशाएं ऐसी हो जो-
"मंज़िल  ऐसी हो जो-
जीवन जीना सीखा दे...!
जीवन ऐसा हो जो-
संबंधों की कदर करे,
"और संबंध ऐसे हो जो-
याद करने को मजबूर कर दे"

होंठ उसके लाल कर दे।

हम दिलफेक आशिक़ है, हर काम में कमाल कर दे
जो वादा करे वो पूरा हर हाल में कर दे
क्या जरुरत है जानू को लिपस्टिक लगाने की
हम चूम-चूम के ही होंठ उसके लाल कर दे।

नैनां मिलेंगे तुझे

कभी मुड़ के देखना निशां-ए-पां मिलेंगे तुझे
जिस तरफ़ प्यार से देखेगी, वहां मिलेंगे तुझे
तड़पती सदाओं का पीछा करती चली आना
तिनके तिनके खूं से लथपथ मैंदां मिलेंगे तुझे
कभी इन ज़ुल्फों के बादल को हटा के देखना
अब्र-ए-फ़लक  भी   यारा  हैरां   मिलेंगे   तुझे
ये बहते झरने के पीछे 'अम्बर' को देखना कभी
झील की तरह बहते पथरीले नैनां मिलेंगे तुझे

उसी को कहते हैं

पानी-पानी रहते हैं
ख़ामोशी से बहते हैं
मरी आंखों के तारे भी
जलते बुझते रहते हैं
बचारे मासूम दिये
दःख सांसों का सहते हैं
ज़िसकी कुछ ताबीर ना हो
ख़वाब उसी को कहते हैं

 हूर नहीं

अपने  हुस्न  पे इतना न गुमान कर
तू जंग लगा पत्थर है, कोहिनूर नहीं....
तेरे वियोग में अश्क़ बहाऊँ मैं
तू कोई अप्सरा या जन्नत की हूर नहीं...

मज़बूरियां बता कर जा

आख़री दफ़ा इक वफ़ा कर जा
दर्द-ए-मोहब्बत अदा कर जा
कमज़ोर करते हैं मुझे अश्क़ तेरे
अपने आंसुओं को छिपा कर जा
मुझे पता , तू ख़ुश नहीं मेरे बग़ैर
झूठा ही सही पर मुस्कुरा कर जा
जब भी याद करूं, दुआ निकले
अपनी मज़बूरियां बता कर जा

तुम्हारे नाम लिखी है!

तुम्हारे प्यार की दास्तां हमने अपने दिल में लिखी है,
न थोड़ी न बहुत बे-हिसाब लिखी है,
किया करो कभी हमे भी अपनी दुआओं में शामिल,
हमने अपनी हर एक सांस तुम्हारे नाम लिखी है!

उन्हे भुलायेगी अक्सर

तुझे प्यार मेरा सतायेगा अक्सर,
यादो के तूफ़ान उठायेगा अक्सर,
जिक्र मेरा करने से पहले,
तू कुछ सोच के मुस्कराएगा अक्सर,
मेरा नाम लिख कर किताबो मे अपनी,
तू लोगो के डर से मिटायेगा अक्सर,
बात मेरी याद आयेगी इतनी,
जितना तु उन्हे भुलायेगी अक्सर..!!

तेरी नज़र आने लगी..

दिल की हसरत ज़ुबान पे आने लगी,
तूने देखा और ज़िंदगी मुस्कुराने लगी,
ये इश्क़ की इंतेहा थी या दीवानगी मेरी,
हर सूरत मे सूरत तेरी नज़र आने लगी..

तो हो जाए !!

पूरी बोतल न सही एक जाम तो हो जाए,
मिलना न सही दुआ-सलाम तो हो जाए,
जिनकी याद में हम बीमार होकर बैठे हैं,
उन्हें बुखार न सही सर्दी-जुकाम तो हो जाए !!

तुम नज़र आते हो।

चुपके से आकर इस दिल में उतर जाते हो,
सांसों में मेरी खुशबु बनके बिखर जाते हो,
कुछ यूँ चला है तेरे इश्क का जादू,
सोते-जागते तुम ही तुम नज़र आते हो।

बदलना नहीं सीखा

सूरज  की रौशनी से  जलना नहीं सीखा
किसी ग़ैर के टुकड़े पे पलना नहीं सीखा
तुझसे इश्क़ किया था जानेजान सच्चे वाला
तेरी तरह, खामियां देख मेहबूब बदलना नहीं सीखा

दिखाया नहीं करते।

हर बात में आंसू बहाया नहीं करते;
दिल की बात हर किसी को बताया नहीं करते;
लोग मुट्ठी में नमक लेके घूमते है;
दिल के जख्म हर किसी को दिखाया नहीं करते।

तूफान क्या जाने।-

दिल पे क्या गुज़री वो अनजान क्या जाने
प्यार किसे कहते है वो नादान क्या जाने
हवाने उड़ा दिया, घर इस परिंदे का 
कैसे बना था घौंसला वो तूफान क्या जाने।

नशा मेरी आँखों में आया

फिज़ाओ का मौसम जाने के बाद बहारो का 
मौसम आया गुलाब से गुलाब का रंग तेरे गालों पर आया
तरे नैनो ने काली घटा का जब काजल
लगाया जवानी जो तुम पर आई तो नशा मेरी आँखों में आया

चले आएंगे!!

वादा करते हैं आपसे हमेशा दोस्ती निभाएंगे, 
कोशिश यही रहेगी आपको नहीं सताएंगे, 
जरूरत कभी पड़े तो दिल से पुकार लेना,
 किसी और के दिल में होंगे तो भी चले आएंगे!!

समय भी काफी है !!

मैंने लिख लिए कई अल्फाज तेरे लिए ....,
तू लापता मग़र आज कल मेरे ख्वाबो में भी है !
ज्यादा वक्त नही मांगते हम तुम्हारे ज़िन्दगी का ....,
कुछ छोटी छोटी यादें जुड़ा पाए इतना समय भी काफी है !!

प्यार और मौत से डरता कौन है
प्यार तो हो जाता हे इसे करता कौन है
हम तो कर दे प्यार मे जान भीक़ुरबान
पर पता तो चले हमसे प्यार करता कौन है

मैं अकेला ही तन्हा रहा

शब-ए-हिज्र में याद  आए  कुछ विसाल घड़ी
फ़ज़ा हुआ खुशनुमा, रवाँ हुई कुछ खार घड़ी
ख़्वाइशों के बज़्म में, मैं अकेला ही तन्हा रहा
अंजुमन-आरा वो हुए, चुप-चाप देखा चार घड़ी

सारा वक़्त गुज़र जाता है।

कहां से लाऊं पक्के सबूत
की तुम्हें कितना चाहते हैं...
दिल,,दिमाग,,नजर
सब तो तेरी कैद में है...
हँसना आता है मुझे .....
मुझसे गम कि बात नहीं होती
मेरी बातों में मज़ाक होता है
पर मेरी हर एक बात मज़ाक नहीं होती..
कितने चेहरे हैं इस दुनिया में,
मगर हमको एक चेहरा ही नज़र आता है। 
दुनिया को हम क्यों देखें,
उसकी याद में सारा वक़्त गुज़र जाता है।

तेरा नाम निकला

ये जो तुम जिसको इश्क़ विश्क कहते हो न 
आज मेरे बिकुल करीब से निकला...
जान जाने ही वाली थी 
उसे पहले ज़ुबा से तेरा नाम निकला...

बदनाम क्यों है?
मोहब्बत की हर गली,गुमनाम क्यों है ?
जुदाई और गम, इसका अंजाम क्यों है ?
लोग नाम देते हैं, इसे खुदा का,
तो मोहब्बत इतनी,बदनाम क्यों है?       
तेरी सादगी पे मर गया.

लफंगा आवारा था फिर भी सुधर गया
तू गई जिधर ए दिल उधर गया
अब ना पूछ मूझको कैसे हुई मोहब्बत 
दिल तो दीवाना था तेरी सादगी पे मर गया.

निगाहों की प्यास नहीं जाती
तू है तो तनहाइयां मेरे पास नहीं आती.
वो खामोशी तेरी मुझको रास नहीं आती.
अब तो आजा मेरे दिल के हरजाई.
तुझको देखे बिन मेरे निगाहों की प्यास नहीं जाती
मैं... भी हूँ

ग़ालिब हूँ और गुलज़ार हूँ मैं,
दुनिया में सर्वमान्य हूँ मैं,
देशों में देश महान हूँ मैं,
मैं देवभूमि, मैं जगतगुरू,
मैं सोने की चिड़िया भी हूँ
मैं दिल से हरा भरा भी हूँ।

दुनिया लोहा माने मेरा,
मैं करूं न तेरा और मेरा
गंगा जमुनी तहज़ीब हूँ मैं,
नवरात्र हूँ मैं, रमज़ान भी हूँ।

केसरिया और हरा भी हूँ
मैं राम हूँ और रहीम भी हूँ
मैं काला हूँ, गोरा भी हूँ।

मैं छोटा और बड़ा भी हूँ
मैं मंदिर का गुम्बद भी हूँ
और मस्जिद की मीनार भी हूँ
मैं घूंघट हूं, बुरखा भी हूं।

मैं गीता औऱ कुरान भी हूं
वेदांत विवेकानंद का मैं
अब्दुल कलाम का ख्वाब भी हूँ
मैं भगत सिंह, अशफ़ाक़ भी हूँ।

तुलसी हूं और रसखान भी हूं
मैं बसा लता के गानों में,
रहमान की उम्दा तानों में।

मैं जोधा हूं, अकबर भी हूं
मैं हीर हूं और रांझा भी हूं
मैं शाहरुख हूं, सलमान भी हूं
अमिताभ और दिलीप कुमार भी हूँ।

मैं हेमा,जया, फरीदा हूँ
नूतन, वैजंती माला हूँ
मैं तो सुभाष मतवाला हूँ
मैं माँ हूँ और खाला भी हूँ,
देविका रानी,मधुबाला हूँ।

मैं ज़ाकिर सा सख्त भी हूँ
और बच्चों सा भोला भी हूँ
मैं राधा हूँ, मीरा भी हूँ
मैं कृष्ण हूँ और सुदामा हूँ।
मैं ज़ाकिर का तबला भी हूँ।

और बिरजू का कथक भी हूँ
मैं लक्ष्मी बाई सी निडर भी हूँ
दामिनी सी डरी डरी भी हूँ
मैं भातखंडे, नालंदा हूँ।

मैं के डी सिंह, मिल्खा भी हूँ
मैं दीवाली और ईद भी हूँ
मैं तो प्राचीन सभ्यता हूँ
संस्कारों की गंगा भी हूँ।

कर्तव्य, वफ़ा, ईमान हूँ मैं,
निःस्वार्थ प्रेम, विश्वास भी हूँ
मैं वसुधैव कुटुम्बकम हूँ।

टुकड़ो में न बांटो मुझको,
मिलकर के प्यार करो मुझको,
न हिन्दू हूं, न मुस्लिम हूं,
न हिंदी हूं, न उर्दू हूं।

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